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झूठे सुख को सुख कहै , मानता है मन मोद। जगत चबेना काल का , कुछ मुख में कुछ गोद॥ 198॥

The heart, believing, calls false joy as pleasure, And in the mouth and lap, the ages devour.

कबीर
अर्थ

झूठे सुख को सुख मानकर मन भ्रम में रहता है, और यह संसार काल के चबाने वाले मुख और गोद जैसा है।

विस्तार

कबीर दास जी हमें समझाते हैं कि हमारा मन अक्सर झूठे और पल भर के सुखों को ही सच्चा आनंद मान लेता है। वे एक बहुत सुंदर और गहरी बात कहते हैं कि यह पूरा संसार तो काल (समय) का चबेना है, जिसे वह लगातार चबा रहा है। इस चबेने का कुछ हिस्सा काल के मुख में है, यानी अभी खत्म हो रहा है, और कुछ उसकी गोद में रखा है, जिसका नंबर आना अभी बाकी है। यह हमें याद दिलाता है कि दुनिया में हर चीज़ क्षणिक है और समय किसी को नहीं बख्शता।

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