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जहाँ आप तहाँ आपदा , जहाँ संशय तहाँ रोगकह कबीर यह क्यों मिटैं , चारों बाधक रोग194

Wherever you are, disaster resides, where doubt exists, disease blooms. Kabir says, why do these four obstacles perish: disease?

कबीर
अर्थ

जहाँ आप तहाँ आपदा, जहाँ संशय तहाँ रोग। शायर कबीर कहते हैं कि ये चारों बाधाएं (आपदा, संशय, रोग) क्यों मिटें।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ समझा रहे हैं कि जहाँ हमारे अंदर 'मैं' यानी अहंकार की भावना होती है, वहाँ मुसीबतें अपने-आप चली आती हैं। और जहाँ मन में संदेह या शक घर कर जाता है, वहाँ बीमारियाँ और परेशानियाँ पैदा होने लगती हैं। वे कहते हैं कि ये चारों बाधाएँ – अहंकार, संदेह, आपदा और रोग – दरअसल बाहर से नहीं आतीं, बल्कि हमारे अपने भीतर से ही उपजती हैं। हमें खुद को पहचानने और इन आंतरिक बंधनों को तोड़ने की राह खोजने के लिए कबीर दास जी प्रेरित कर रहे हैं।

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