“While the world's bonds exist, devotion is absent; when Hari breaks the bonds, which devotees will remain?”
जब तक संसार के रिश्ते बने रहेंगे, तब तक भक्ति का होना संभव नहीं है। जब हरि (भगवान) इन रिश्तों को तोड़ देंगे, तो कौन भक्त कहलाएगा।
कबीर दास जी हमें प्यार से समझा रहे हैं कि जब तक हम दुनिया के रिश्ते-नातों और मोह-माया में उलझे रहते हैं, तब तक सच्ची भक्ति दिल में पूरी तरह से नहीं उतर पाती। ये सांसारिक बंधन एक तरह की बेड़ियां बन जाते हैं जो हमें परमात्मा से जुड़ने और सच्ची आज़ादी महसूस करने से रोकते हैं। सच्चा भक्त तो वही है जो इन सब बंधनों को छोड़कर, अपना पूरा ध्यान प्रभु हरि की भक्ति में लगा देता है। यह दोहा हमें सिखाता है कि अगर हमें ईश्वर से गहरा जुड़ाव महसूस करना है, तो हमें अपने मन को दुनियावी आसक्तियों से थोड़ा अलग करना सीखना होगा।
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