कबीरा जपना काठ की , क्या दिख्लावे मोय। ह्रदय नाम न जपेगा , यह जपनी क्या होय॥

“Kabira, chanting the name of Kaath, what will you show me? This heart will not chant the name; what is this recitation?”

— कबीर
अर्थ

कबीरा, काठ की माला से मुझे क्या दिखाई देगा? मेरा हृदय नाम नहीं जपेगा; यह जपनी क्या चीज़ है।

विस्तार

कबीरदास जी यहाँ समझा रहे हैं कि हाथ में लकड़ी की माला लेकर बस बाहरी तौर पर नाम जपने का कोई फायदा नहीं, अगर मन उसमें लीन न हो। वे कहते हैं कि अगर दिल ही ईश्वर का नाम सच्चे भाव से नहीं जपेगा, तो भला ये दिखावटी माला जपना किस काम का? असल भक्ति तो भीतर से उपजती है, मन की सच्ची लगन से, न कि बस ऊपरी तौर पर नियमों का पालन करने से।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

← Prev42 / 10