माटी कहे कुम्हार से , तु क्या रौंदे मोय। एक दिन ऐसा आएगा , मैं रौंदूंगी तोय॥

“The earth says to the potter, 'You do not crush me. A day will come when I will crush you.'”

— कबीर
अर्थ

माटी (मिट्टी) कुम्हार से कहती है कि 'तुम मुझे क्यों रौंदते हो? एक दिन ऐसा आएगा जब मैं तुम्हें रौंदूंगी।'

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में मिट्टी और कुम्हार के रिश्ते से जीवन के गहरे चक्र को समझाते हैं। कुम्हार भले ही मिट्टी को अपने हाथों से रौंदकर नया रूप देता है, पर मिट्टी उसे याद दिलाती है कि एक दिन सब कुछ उसी मिट्टी में मिल जाना है। यह हमें सिखाता है कि किसी भी चीज़ पर हमारा अधिकार क्षणिक है और हमें हमेशा विनम्र रहना चाहिए। यह दोहा प्रकृति के अटूट नियम और जीवन की नश्वरता का सुंदर प्रतीक है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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