ग़ज़ल
कबीर दोहे
کبیر دوہے
कबीर· Ghazal
यह दोहा बताता है कि मनुष्य दुख में तो सब का सहारा बन जाते हैं, लेकिन सुख में कोई साथ नहीं देता। यह भी सिखाता है कि केवल बाहरी माला फेरना व्यर्थ है; मन की वृत्तियों और विचारों को सुधारना आवश्यक है। साथ ही, यह गुरु के महत्व को स्थापित करता है, जो ईश्वर तक पहुँचने का सही मार्ग दिखाते हैं।
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