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दाया भाव ह्र्दय नहीं , ज्ञान थके बेहद। ते नर नरक ही जायेंगे , सुनि-सुनि साखी शब्द॥ 80॥

If the heart is not filled with the emotion of compassion, nor with the boundless knowledge, those men will surely go to hell, I testify this word by word.

कबीर
अर्थ

यदि हृदय करुणा के भाव से और असीम ज्ञान से भरा नहीं है, तो वे मनुष्य निश्चित रूप से नरक में जाएंगे; मैं यह साखी शब्द-दर-शब्द कहता हूँ।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में हमें दिल की सबसे ज़रूरी बात सिखा रहे हैं। वे कहते हैं कि सिर्फ ढेर सारा ज्ञान बटोर लेना काफी नहीं है, क्योंकि अगर हृदय में दया और करुणा का भाव न हो, तो वह सारा ज्ञान अधूरा और थका हुआ सा लगता है। बिना इस हृदय की कोमलता और परोपकार के, कितना भी ज्ञान हो, इंसान को सही राह नहीं दिखा सकता। कबीर जी जोर देकर कहते हैं कि सच्ची समझ तो इसी प्रेम और दया में ही बसी है, नहीं तो भटकना तय है।

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