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झूठे गुरु के पक्ष की , तजत न कीजै वार। द्वार न पावै शब्द का , भटके बारम्बार॥ 492॥

Do not surrender to the side of a false teacher. For one who wanders repeatedly, never finds the word's door.

कबीर
अर्थ

झूठे गुरु के साथ पक्ष लेना छोड़ दो, क्योंकि जो व्यक्ति बार-बार भटकता है, वह कभी भी शब्द के द्वार तक नहीं पहुँच पाता।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ बड़ी ख़ूबसूरती से समझा रहे हैं कि हमें कभी भी किसी झूठे गुरु के बहकावे में नहीं आना चाहिए। वे कहते हैं कि अगर हम बिना सोचे-समझे बार-बार भटकते रहेंगे, तो 'शब्द' यानी उस परम सत्य, उस दिव्य ज्ञान के द्वार तक कभी नहीं पहुँच पाएँगे। यह एक तरह से जीवन की राह पर सही दिशा और सच्चे मार्गदर्शन की अहमियत बता रहा है, कि बाहरी दिखावे से दूर रहकर ही भीतर की सच्चाई तक पहुँचा जा सकता है।

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