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पूरा सतगुरु न मिला , सुनी अधूरी सीख। स्वाँग यती का पहिनि के , घर घर माँगी भीख॥ 488॥

The true Guru was not found, only incomplete teachings were heard. Wearing the robes of a renunciate, begging for alms in every house.

कबीर
अर्थ

पूरा सतगुरु न मिला, केवल अधूरी सीख मिली। साधु-यती के वस्त्र पहनकर, हर घर से भीख माँगी।

विस्तार

यह दोहा बताता है कि जब हमें सच्चा गुरु नहीं मिलता और हम सिर्फ अधूरी बातें सुनते हैं, तो हमारा हाल कैसा होता है। भले ही हम वैरागी का भेष बनाकर घर-घर भीख मांगते फिरें, लेकिन अगर ज्ञान पूरा न हो तो यह सब व्यर्थ है। कबीरदास जी हमें समझाते हैं कि बाहरी दिखावा और आधी-अधूरी शिक्षा हमें परमात्मा तक नहीं पहुंचा सकती, असली रास्ता तो सच्चे गुरु की पूरी सीख में ही है।

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