राजा की चोरी करे , रहै रंग की ओट। कहैं कबीर क्यों उबरै , काल कठिन की चोट॥

“The king's theft is covered by the curtain of color. Kabir asks, why can one escape? From the blow of difficult time.”

— कबीर
अर्थ

राजा की चोरी को रंग की ओट छिपाती है, और शायर कबीर कहते हैं कि इससे कैसे बचा जा सकता है, जो कि काल की कठिन चोट है।

विस्तार

यह दोहा हमें समझाता है कि लोग कैसे सांसारिक मोहमाया और दिखावों (जो 'रंग की ओट' है) की आड़ में अपने कर्मों या गलतियों को छिपाने की कोशिश करते हैं। पर कबीर जी पूछते हैं कि जब कोई इन रंगीन भ्रमों में फँसा है, तो भला समय की कठिन मार, यानी मृत्यु या भाग्य से कैसे बच सकता है? उनका कहना है कि ये सब केवल क्षणभंगुर माया है, और अंततः कोई भी काल की शक्ति से बच नहीं सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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