पतिवृता मैली , काली कुचल कुरूप। पतिवृता के रूप पर , वारो कोटि सरूप॥ 44॥ बैध मुआ रोगी मुआ , मुआ सकल संसार। एक कबीरा ना मुआ , जेहि के राम अधार॥ — कबीर

पतिवृता मैली , काली कुचल कुरूप। पतिवृता के रूप पर , वारो कोटि सरूप॥ 44॥ बैध मुआ रोगी मुआ , मुआ सकल संसार। एक कबीरा ना मुआ , जेहि के राम अधार॥

“Your husband's soiled, stained, and ugly form; upon your husband's beauty, countless forms are spent. (But) your husband's dead, sick, and lifeless body; the whole world is lifeless. Only Kabir is not dead, who is founded upon Rama.”

— कबीर

अर्थ

पतिवृता मैली, काली कुचल कुरूप। पतिवृता के रूप पर, वारो कोटि सरूप। (अर्थात्, पति का रूप गंदा, काला, कुचला और कुरूप है। पति के रूप पर करोड़ों रूप खर्च होते हैं।) बैध मुआ रोगी मुआ, मुआ सकल संसार। एक कबीरा ना मुआ, जेहि के राम अधार। (अर्थात्, यह संसार, रोगी और मृत है, सब कुछ मृत है। केवल कबीरा नहीं मरा, जो राम पर आधारित है।)

विस्तार

यहाँ कबीर दास जी संसार की उस मोह-माया पर प्रकाश डाल रहे हैं जो क्षणभंगुर शारीरिक सुंदरता और दिखावे में उलझी रहती है, जिसे अंततः मलिन और कुरूप ही होना है। वे कहते हैं कि इस नश्वर संसार में वैद्य, रोगी और हर कोई मृत्यु को प्राप्त होता है। लेकिन जिसने राम नाम को अपना आधार बनाया है, वह अमरता पा लेता है, जैसे कबीर स्वयं। यह हमें याद दिलाता है कि सच्ची सुंदरता और स्थायी अस्तित्व केवल प्रभु भक्ति में ही है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

← Prev43 / 10