सिर साटें हरि सेवेये , छांड़ि जीव की बाणि। जे सिर दीया हरि मिलै , तब लगि हाणि न जाणि॥ 404॥ जेते तारे रैणि के , तेतै बैरी मुझ। धड़ सूली सिर कंगुरै , तऊ न बिसारौ तुझ॥ — कबीर

सिर साटें हरि सेवेये , छांड़ि जीव की बाणि। जे सिर दीया हरि मिलै , तब लगि हाणि न जाणि॥ 404॥ जेते तारे रैणि के , तेतै बैरी मुझ। धड़ सूली सिर कंगुरै , तऊ न बिसारौ तुझ॥

“Leaving the life's pursuits, one should dedicate oneself to Hari (God). If the head is offered to Hari, then truly there is no loss. O, my enemies, as many as the stars in the sky, even if the body is broken and the head hangs like a vulture, you will never forget me.”

— कबीर

अर्थ

सिर साटें हरि सेवेये, छांड़ि जीव की बाणि। जे सिर दीया हरि मिलै, तब लगि हाणि न जाणि॥ और जेते तारे रैणि के, तेतै बैरी मुझ। धड़ सूली सिर कंगुरै, तऊ न बिसारौ तुझ॥

विस्तार

कबीर कहते हैं कि सच्चे सुख के लिए हमें दुनियावी मोह छोड़कर अपना जीवन पूरी तरह से हरि (ईश्वर) को समर्पित कर देना चाहिए। वे समझाते हैं कि अगर हम अपना अहंकार या 'सिर' भगवान को अर्पित कर दें, तो इसमें कोई वास्तविक नुकसान नहीं, बल्कि सच्ची प्राप्ति है। अपने अटूट प्रेम और विश्वास को दर्शाते हुए वे कहते हैं कि चाहे कितने भी दुश्मन हों और वे उन्हें मिटाने की कितनी भी कोशिश करें, फिर भी कबीर को हमेशा याद रखा जाएगा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.