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कबीर घोड़ा प्रेम का , चेतनि चाढ़ि असवार। ग्यान खड़ग गहि काल सिरि , भली मचाई मार॥ 402॥

Kabir, mounting the steed of love, the consciousness riding high, With the sword of knowledge, taking life by the head, making a mighty roar.

कबीर
अर्थ

कबीर कहते हैं कि प्रेम के घोड़े पर सवार होकर, चेतना को ऊँचा उठाते हुए, ज्ञान की तलवार लेकर काल के सिर पर प्रहार करके, एक बड़ी गर्जना मचाते हैं।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ प्रेम, चेतना और ज्ञान को एक अद्भुत रूपक में पिरो रहे हैं! वे कहते हैं कि प्रेम का घोड़ा है, जिस पर हमारी जागृत चेतना सवार है। इस आध्यात्मिक यात्रा में, ज्ञान की तलवार लेकर हम काल (समय और मृत्यु के भय) के सिर पर प्रहार करते हैं, और इस तरह जीवन की सच्चाइयों का सामना बड़े साहस से करते हैं।

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