परनारी का राचणौ , जिसकी लहसण की खानि। खूणैं बेसिर खाइय , परगट होइ दिवानि॥ — कबीर
“The beauty of a woman, a mine of fragrant grace; whose breath is sweet, and who glows with divine light.”
अर्थ
यह दोहा कहता है कि एक स्त्री की सुंदरता सुगंधित कृपा के खान जैसी होती है; जिसकी साँसें मधुर हैं और जो दैवीय प्रकाश से चमकती है।
विस्तार
कबीर दास जी यहाँ पराई स्त्री के प्रति आकर्षित होने के खतरे समझा रहे हैं। वे कहते हैं कि यह ऐसा है जैसे लहसुन की खानि में होना—इसकी गंध कितनी भी छिपाने की कोशिश करो, छिप नहीं पाती। चाहे इसे कितनी भी गुप्त रूप से, अकेले में क्यों न किया जाए, इसकी सच्चाई आखिरकार दुनिया के सामने प्रकट हो ही जाती है। यह हमें सिखाता है कि कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनकी दुर्गंध, या परिणाम, कभी छिप नहीं सकते और सार्वजनिक रूप से बदनामी का कारण बनते हैं।
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