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पतिबरता मैली भली , गले कांच को पोत। सब सखियन में यों दिपै , ज्यों रवि ससि को जोत॥ 274॥

My husband is better than a soiled garment, and my neck is better than a glass ornament. Among all my friends, I am like the sunlight to the moon.

कबीर
अर्थ

पति का साथ मैले वस्त्र से अच्छा है और गले में काँच के आभूषण से बेहतर है। मैं सभी सखियों में ऐसी हूँ, जैसे चंद्रमा को सूर्य का प्रकाश।

विस्तार

यह दोहा हमें बताता है कि सच्ची सुंदरता बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि मन की पवित्रता और सद्गुणों में होती है। कबीर दास जी कहते हैं कि एक पतिव्रता स्त्री, भले ही वह सादे वस्त्रों में हो या साधारण काँच के गहनों से सजी हो, अपनी सखियों के बीच उसी तरह चमकती है, जैसे सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश। वह अपनी आंतरिक आभा से अपने आसपास के सभी लोगों को रोशन करती है और उन्हें राह दिखाती है।

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