कबीर एक न जाण्यां , तो बहु जाण्यां क्या होइ। एक तै सब होत है , सब तैं एक न होइ॥ 269॥
“If you do not know Kabir, what good is knowing much? In essence, everything is Kabir; nothing is separate from Kabir.”
— कबीर
अर्थ
कबीर कहते हैं कि यदि आप कबीर को नहीं जानते हैं, तो बहुत कुछ जानना क्या लाभ है। सार रूप में, सब कुछ कबीर है, और कबीर से कुछ भी अलग नहीं है।
विस्तार
कबीर दास जी यहाँ समझा रहे हैं कि अगर हमने उस एक परम सत्य को नहीं जाना, जिसने सब कुछ बनाया है, तो बहुत सारा ज्ञान इकट्ठा करने का क्या फायदा? वे कहते हैं कि सारी सृष्टि उसी एक से निकली है, जैसे एक बीज से पूरा पेड़ बनता है। हमें बाहरी चीज़ों में उलझने की बजाय अपने भीतर उस एक परमात्मा को खोजने की सलाह देते हैं, क्योंकि असली ज्ञान वहीं छुपा है।
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