“Everyone tries to turn towards Hari (God) by various means, but repeatedly turning like this, the sheep will never reach Vaikuntha (heaven).”
हर कोई अलग-अलग तरीकों से हरि (भगवान) को पाने की कोशिश करता है, लेकिन बार-बार ऐसे मुड़ते रहने से भेड़ बैकुंठ नहीं जा पाएगी।
यह दोहा हमें सिखाता है कि सिर्फ बाहरी दिखावे या कर्मकांडों से भगवान को नहीं पाया जा सकता। कबीर दास जी कितनी सहजता से कहते हैं कि अगर सिर्फ सिर मुंडाने या ऊपर-ऊपर से कुछ करने से हरि मिल जाते, तो भला कौन ऐसा नहीं करता? वे भेड़ का उदाहरण देकर समझाते हैं कि बार-बार ऐसी ही बाहरी क्रियाएं दोहराने से, बिना मन लगाए, कोई भी सच्चा ज्ञान या 'बैकुंठ' तक नहीं पहुँच पाता। असल में तो सच्ची लगन और भीतर की शुद्ध भावना ही हमें ईश्वर से जोड़ती है।
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
