“By speech, discern the cunning thief's trap; from one's inner deeds, all words are revealed.”
वाणी से पहचानिए, साम चोर की घात। अन्दर की करनी से सब, निकले मुँह की बात। इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति के बोलने के तरीके से ही उसके छल या कपट का पता लगाया जा सकता है, और अंततः उसके आंतरिक कर्मों से ही उसके मन की बातें बाहर आ जाती हैं।
कबीर दास जी इस दोहे में हमें समझा रहे हैं कि चोर भी अपनी मीठी बातों से हमें फंसाने की घात लगाए बैठा होता है, इसलिए केवल शब्दों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी की सच्ची नीयत तो उसके अंदरूनी कर्मों से ही झलकती है, जैसे आईने में सब कुछ साफ दिख जाता है। दरअसल, व्यक्ति के भीतर के विचार और कर्म ही उसकी जुबान से निकली हर बात की सच्चाई को आखिर में सामने लाते हैं। यह हमें सिखाता है कि दिखावटी बातों से परे, सच्चे चरित्र को उसके आचरण से पहचानना चाहिए।
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