बूँद पड़ी जो समुद्र में , ताहि जाने सब कोय। समुद्र समाना बूँद में , बूझै बिरला कोय॥

“What the drop falling into the ocean knows, no one can know. What the ocean contains within the drop, few people understand.”

— कबीर
अर्थ

जब एक बूँद समुद्र में गिरती है, तो वह क्या जानती है, यह कोई नहीं जानता। और बूँद में जो समुद्र समाया है, उसे समझना बहुत कम लोग जानते हैं।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में बूँद और समुद्र के सुंदर रूपक से गहरी बात समझाते हैं। पहली पंक्ति में, जब एक बूँद समुद्र में मिलती है, तो यह बाहरी मिलन सबको दिखता है। लेकिन दूसरी पंक्ति में, जब पूरा समुद्र एक छोटी सी बूँद में समा जाए, उस गहरे रहस्य को कुछ ही बिरले लोग समझ पाते हैं। यह हमें बताता है कि अपने भीतर उस विशाल ब्रह्मांडीय सत्य को पहचानना ही असली ज्ञान है, जो बहुत कम लोगों को नसीब होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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