तब लग तारा जगमगे , जब लग उगे नसूर। तब लग जीव जग कर्मवश , जब लग ज्ञान ना पूर॥ 204॥
“When the stars shine, and when the blind man awakens, When the soul is active with action, and when knowledge is not complete.”
— कबीर
अर्थ
जब तक तारे जगमगाते हैं और जब तक अंधा व्यक्ति जागता है, तब तक जीव कर्म के वश में है और जब तक ज्ञान पूरा नहीं होता।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में जीवन की उस गहराई को समझाते हैं जहाँ हम अक्सर उलझे रहते हैं। वे कहते हैं कि जैसे रात में तारे तब तक जगमगाते हैं, या कोई बात (जैसे नसूर यानी गहरा भेद) तब तक उजागर नहीं होती, वैसे ही हमारी आत्मा भी तब तक कर्मों के बंधन में बंधी रहती है, जब तक उसे पूर्ण ज्ञान की रोशनी नहीं मिल जाती। यह हमें सिखाता है कि जब तक हमें आत्मज्ञान नहीं होता, हम संसार के मोह-माया में लिप्त रहते हैं, ठीक वैसे ही जैसे अंधेरे में तारे चमकते रहते हैं।
