ते दिन गये अकारथी , संगत भई न संत। प्रेम बिना पशु जीवना , भक्ति बिना भगवंत॥

“Those days passed without prayer, and I found no company of saints. Life without love is like an animal, and life without devotion is like a god (to whom one is not devoted).”

— कबीर
अर्थ

ये दिन बिना प्रार्थना के निकल गए, और मुझे संतों की संगत नहीं मिली। प्रेम के बिना जीवन पशु जैसा है, और भक्ति के बिना जीवन भगवान जैसा नहीं है।

विस्तार

यह दोहा हमें समझाता है कि प्रेम और भक्ति के बिना जीवन अधूरा है। कबीरदास जी कहते हैं कि अगर हमने संतों का साथ नहीं पाया और दिन अकारण ही बीत गए, तो यह हमारा ही नुकसान है। वे साफ कहते हैं कि प्रेम के बिना हमारा जीवन पशुओं जैसा निरर्थक है, और सच्ची लगन भरी भक्ति के बिना तो भगवान भी हमसे दूर ही रहते हैं। यह हमें सिखाता है कि जीवन में आंतरिक भावों और गहरे जुड़ाव का कितना महत्व है।

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