कहा कियो हम आय कर , कहा करेंगे पाय। इनके भये न उतके , चाले मूल गवाय॥
“Where shall we go, where shall we settle? We have lost our original way, and cannot proceed.”
— कबीर
अर्थ
हमने कहा कि हम कहाँ आएं और कहाँ जाएँ। इनके होने से न उतके और मूल मार्ग ही गँवा दिया।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में गहरे असमंजस और अपनी जड़ों से कट जाने की बात कह रहे हैं। वे पूछते हैं कि जब हम अपनी मूल पहचान और सही मार्ग से भटक गए हैं, तो कहाँ जाकर टिकेंगे और क्या हासिल करेंगे। यह हमें याद दिलाता है कि जब हम अपने असली स्वरूप से दूर हो जाते हैं, तो हम न इधर के रहते हैं न उधर के, बस दिशाहीन होकर रह जाते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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