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कबीरा संगत साधु की , निष्फल कभी होयहोमी चन्दन बासना , नीम कहसी कोय156

The company of saints, Kabir, is never in vain; the fragrance of sandalwood will never be denied.

कबीर
अर्थ

कबीरा संगत साधु की, निष्फल कभी न होय। होमी चन्दन बासना, नीम न कहसी कोय। इसका अर्थ है कि कबीर कहते हैं कि संतों की संगति कभी व्यर्थ नहीं जाती; चंदन की सुगंध का कभी इनकार नहीं किया जा सकता।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ समझाते हैं कि साधु-संतों की संगति कभी व्यर्थ नहीं जाती, इसका फल हमेशा मिलता है। वे चंदन के इत्र का बहुत सुंदर उदाहरण देते हैं, जैसे चंदन की खुशबू एक बार लिपट जाए तो उसे कोई नीम की कड़वाहट नहीं कह सकता। ठीक वैसे ही, अच्छे लोगों के साथ रहने से हमारे भीतर सद्गुण ऐसे रच-बस जाते हैं कि उनका प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है और कोई उसे नकार नहीं सकता। यह साथ हमारी आत्मा को महका देता है।

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