“Kabiira, do not grieve, nor laugh at anyone. In this boat (of life) on the ocean, who knows what may happen.”
कबीरा, तुम शोक मत करो और न ही कभी किसी पर हँसना। इस समुद्र में नाव पर, यह नहीं पता कि क्या होगा।
कबीरदास जी इस दोहे में हमें जीवन की अनिश्चितता का एक बहुत ही प्यारा पाठ सिखा रहे हैं। वे कहते हैं कि हमें कभी अहंकार नहीं करना चाहिए और न ही किसी पर हँसना चाहिए, क्योंकि हमारी जिंदगी की नाव अभी समुद्र में है, और हमें नहीं पता कि अगले ही पल क्या हो जाए। यह नाव रूपी जीवन और अथाह समुद्र रूपी दुनिया के सफर में विनम्रता और धैर्य बनाए रखने की सीख है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है, इसलिए हर पल को सावधानी और स्वीकृति के साथ जीना चाहिए।
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