आग जो लगी समुद्र में , धुआँ ना प्रकट होय। सो जाने जो जरमुआ , जाकी लाई होय॥ 138॥
“Like a fire that burns in the sea, no smoke will appear. So too, the life that burns away, no trace will be left here.”
— कबीर
अर्थ
समुद्र में लगी आग की तरह, जो धुआँ नहीं निकलती, वैसे ही जो जीवन जलकर समाप्त होता है, उसका कोई निशान नहीं रह जाता।
विस्तार
कबीर जी इस दोहे में हमें एक बहुत गहरी बात समझाते हैं, बिल्कुल दिल को छू जाने वाली। वो कहते हैं कि जैसे समुद्र में आग लगे और उसका धुआँ तक न दिखे, वैसे ही भीतर के प्रेम या वैराग्य की जलन होती है। जो इस अनूठी आग को अपने अंदर महसूस करता है, बस वही जानता है कि ये कितनी गहरी और बिना किसी बाहरी निशान के होती है। यह हमें बताता है कि जीवन के कुछ सबसे बड़े सत्य अक्सर शांत और अदृश्य होते हैं।
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