खेत ना छोड़े सूरमा , जूझे दो दल मोह। आशा जीवन मरण की , मन में राखें नोह॥

“O warrior, do not abandon your field; let the two parties of attachment fight. Keep the hope of life and death stored in your heart.”

— कबीर
अर्थ

शायर कह रहे हैं कि योद्धा को अपना कार्यक्षेत्र नहीं छोड़ना चाहिए; उसे मोह के दो पक्षों से लड़ना चाहिए और जीवन-मृत्यु की आशा को मन में बनाए रखना चाहिए।

विस्तार

कबीरदास जी इस दोहे में हमें जीवन के युद्धक्षेत्र को न छोड़ने की सलाह देते हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे एक शूरवीर अपने रणभूमि को कभी नहीं त्यागता। वे कहते हैं कि हमारे भीतर मोह और आसक्ति के जो अलग-अलग दल लगातार लड़ते रहते हैं, उन्हें जूझने दो, उनसे दूर भागने की बजाय सामना करो। जीवन और मरण दोनों की आशा या स्वीकृति को मन में संजोकर ही हम एक गहरा संतुलन और वैराग्य पा सकते हैं।

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