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साँई आगे साँच है , साँई साँच सुहाय। चाहे बोले केस रख , चाहे घौंट भुण्डाय॥ 123॥

The truth is before the Divine, the Divine is the truth. Whether it speaks of beauty or of sacrifice, it is so.

कबीर
अर्थ

साँई (ईश्वर) से पहले सत्य है, और ईश्वर ही सत्य है। चाहे वह सुंदरता की बात करे या त्याग की, यह सच है।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ समझाते हैं कि ईश्वर के सामने सिर्फ सच्चाई ही मायने रखती है, क्योंकि ईश्वर स्वयं सत्य का ही स्वरूप है। वे कहते हैं कि चाहे कोई केश बढ़ाए या सिर मुंडा ले, इन बाहरी दिखावों से ईश्वर को कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके लिए हमारी सच्ची भावनाएं और हमारा सत्यनिष्ठ व्यवहार ही सबसे प्यारा होता है। यह दोहा हमें सिखाता है कि हमें ऊपरी आडंबरों से परे, अपनी आत्मा की सच्चाई पर ध्यान देना चाहिए।

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