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एक कहूँ तो है नहीं , दूजा कहूँ तो गार। है जैसा तैसा हो रहे , रहें कबीर विचार॥ 121॥

If I speak one thing, it is not; if I speak another, it is false. As it is, so let Kabir contemplate.

कबीर
अर्थ

यदि मैं एक बात कहूँ तो वह नहीं है, और यदि मैं दूसरी बात कहूँ तो वह झूठ है। जैसा है, वैसा ही शायर को विचार करना चाहिए।

विस्तार

कबीर यहाँ समझाना चाहते हैं कि परम सत्य को शब्दों में बयान करना कितना मुश्किल है। अगर वे उसे 'एक' कहते हैं, तो वह उसकी पूरी पहचान नहीं होती, और अगर 'दूसरा' कहें तो वह एक तरह से झूठा या अधूरा लगता है। वे कहते हैं कि सबसे अच्छा तो यही है कि चीजें जैसी हैं, उन्हें वैसे ही रहने दिया जाए, और कबीर अपने विचारों में बस उसी भाव में डूबे रहें। यह दिखाता है कि कुछ बातें इतनी गहरी होती हैं कि उन्हें शब्दों के बंधन में नहीं बाँधा जा सकता, बस अनुभव किया जा सकता है।

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