“O my Guru, I sacrifice myself to you, For moments more precious than a hundred times a hundred. For you, you transform mere man into divinity, A feat that cannot be measured by mere counts.”
मेरे गुरु पर मेरा बलिदान है, जो हर पल सौ सौ बार से अधिक है। आप मनुष्य को देवता में ऐसा परिवर्तन करते हैं, जिसका कोई माप नहीं है।
कबीर दास जी अपने गुरु के प्रति गहरा प्रेम और समर्पण व्यक्त करते हुए कहते हैं कि वे उन पर सौ-सौ बार न्यौछावर हैं। यहाँ गुरु की महिमा इतनी अलौकिक है कि वे एक साधारण मनुष्य को भी दिव्य गुणों से संपन्न कर देते हैं, उसे देवतुल्य बना देते हैं। यह रूपांतरण इतना सहज और त्वरित होता है कि इसमें ज़रा भी देर नहीं लगती, मानो गुरु की कृपा का कोई हिसाब ही न हो। गुरु का ज्ञान हमें अज्ञानता से निकालकर परम सत्य की ओर ले जाता है, जो किसी भी भौतिक गणना से परे है।
