વૈશાખી દાવાનલ! આવો, દિલદાર! જનની નિજ બાળને ન હજુ ખાઈ જાતી!

“O Vaishakh's scorching blaze! Come, my beloved! A mother does not yet devour her own child!”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

हे वैशाख की जलती हुई आग! आओ, प्रिय! एक माँ अभी तक अपने ही बच्चे को नहीं खाती।

विस्तार

यह दोहा एक बहुत ही कठिन परिस्थिति का चित्रण करता है। यह "वैशाख की दावानल" को पुकारता है, जो भीषण गर्मी और विनाश का एक शक्तिशाली प्रतीक है, जिससे अत्यधिक कठिनाई का समय इंगित होता है। फिर, यह एक "प्रिय" को बुलाता है, शायद संकट के बीच सांत्वना या उद्धारकर्ता की तलाश में। दूसरी पंक्ति एक कठोर सत्य प्रस्तुत करती है: "माँ अभी तक अपने बच्चे को नहीं खाती!" यह गहरा कथन इस बात पर प्रकाश डालता है कि ऐसी चरम पीड़ा में भी, जहाँ सब कुछ अंतिम सीमा तक धकेला जा रहा है, सबसे पवित्र बंधन - माँ और बच्चे का - निराशा से टूटा नहीं है। यह स्थायी आशा का प्रमाण है या अंतिम विनाश से पहले हस्तक्षेप के लिए एक प्रार्थना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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