‘અલી માળાઘેલુડી, લેતી જા હવે રે!’ હરિ! ક્યાં રે રાખું તમારાં દાનને રે?

“'O foolish woman of the rosary, take this now!'O Lord! Where shall I keep your gifts?”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

कोई माला जपने वाली मूर्ख स्त्री से कह रहा है कि अब इसे ले जा। वक्ता भगवान से पूछता है कि वह उनके दिए हुए दानों को कहाँ रखेगा।

विस्तार

यह दोहा ईश्वर की असीम कृपा को खूबसूरती से दर्शाता है। भक्त, शायद माला जप या प्रार्थना में गहरा डूबा हुआ है, उसे 'अरी मेरी प्यारी, माला में खोई हुई!' कहकर संबोधित किया गया है। यह गहन भक्ति का दृश्य प्रस्तुत करता है। फिर, भगवान की ओर मुड़ते हुए, भक्त पुकारता है, 'हे हरि! तुम्हारे अनमोल दानों को मैं कहाँ रखूँ?' यह ईश्वर के आशीर्वाद और प्रेम से पूरी तरह से भरे होने की गहरी भावना को व्यक्त करता है, जहाँ और अधिक प्राप्त करने की क्षमता नहीं बची है। यह कृतज्ञता से भरे हृदय की विनम्र पुकार है, जो दैवीय कृपा से इतना समृद्ध महसूस करता है कि ईश्वर की दया और उदारता की विशालता से लगभग अभिभूत हो जाता है।

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