આમ બેધ્યાન ક્યાં થઈ ગયો’તો?’ 'દીપમાલાની સ્વારી વિષે, શેઠજી!

“Why were you so lost in thought like this?About the procession of lamps, Sethji!”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

आप इस तरह कहाँ बेध्यान हो गए थे? दीपमाला की सवारी के विषय में, सेठजी!

विस्तार

यह दो पंक्तियों का संवाद है। एक व्यक्ति दूसरे से पूछता है, "तुम ऐसे कहाँ खो गए थे?" जवाब आता है, "सेठजी, मैं तो बस दीपमाला की सवारी के बारे में सोच रहा था!" यहाँ कोई दीपों की भव्य शोभायात्रा या रोशनी के उत्सव में इतना खोया हुआ है कि वो अपने आसपास की दुनिया भूल गया है। यह दिवाली या किसी और रोशनी के त्यौहार के दौरान दीपों की सुंदरता को दर्शाता है, जो मन को मोहित कर लेती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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