શબદને સરજે નહિ ઘનમેહુલા ન સમીર

“Words are not created,By dense clouds nor the breeze.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

शब्द न तो घने बादलों द्वारा बनाए जाते हैं और न ही हवा द्वारा।

विस्तार

यह दोहा खूबसूरती से बताता है कि कोई गहरा सत्य या मूल तत्व किसी बाहरी शक्ति द्वारा नहीं बनाया जाता। यह न तो भारी बारिश के बादलों से पैदा होता है और न ही हवा इसे अपने साथ लाती है। इसका अर्थ है कि एक ऐसी वास्तविकता है जो हमारी इंद्रियों से परे है और भौतिक संसार में बनने-बिगड़ने वाली चीज़ों से अलग है। यह एक शाश्वत, अनगढ़ आंतरिक सार या दिव्य चिंगारी की ओर इशारा करता है जो सभी प्राकृतिक घटनाओं और बोले गए शब्दों से स्वतंत्र रूप से मौजूद है। यह सुझाव देता है कि सच्चा ज्ञान या परम सत्य बाहरी शोर या क्षणभंगुर घटनाओं में नहीं मिलता, बल्कि यह भीतर ही एक शांत, अनगढ़ स्थान में मौजूद है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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