મારો પ્રાણ કરી પુલકાટ ગયો પથરાઈ સારી વનરાઈ પરે, ઓ રે! મેઘ આષાઢીલો આજ મારે દોય નેન નીલાંજન-ઘેન ભરે.

“My soul, in ecstasy, spread across the entire wilderness,O! This Ashadha cloud today fills my two eyes with an intoxicating kohl-like darkness.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

मेरा प्राण पुलकित होकर सारी वनराई पर फैल गया। ओह! यह आषाढ़ का बादल आज मेरी दोनों आँखों में नीले अंजन की सी मदहोशी भर देता है।

विस्तार

यह युगलगीत वर्षा ऋतु में प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का वर्णन करता है। कवि कहते हैं कि उनका प्राण, यानी उनकी आत्मा, इतनी आनंदित और पुलकित है कि वह पूरे वन में फैल गई है, मानो प्रकृति का ही एक अंग बन गई हो। फिर वे आषाढ़ के बादलों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि आज इन सावन के बादलों ने उनकी दोनों आँखों को नीले अंजन जैसे गहरे नशे से भर दिया है। यह एहसास है कि वर्षा ऋतु की सुंदरता और वातावरण इतना गहरा है कि वह उनके भीतर तक उतर गया है, और वे प्रकृति की इस मादकता में पूरी तरह डूब गए हैं।

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