ઓલી કોણ પયોધર સંઘરતી વીખરેલ લટે ખડી મે’લ પરે! નદી-તીર કેરાં કૂણાં ઘાસ પરે પનિહાર એ કોણ વિચાર કરે,

“Who is that, on the palace standing, with tangled tresses, her bosom hiding?Who is that water-bearer, on the river-bank's soft grass, in deep thought abiding?”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

वह कौन है, जो महल पर बिखरे बालों के साथ अपना वक्ष छिपाए खड़ी है? नदी किनारे कोमल घास पर वह पनिहारिन कौन से विचार में लीन है?

विस्तार

यह दोहा दो अलग-अलग दृश्यों को सुंदरता से प्रस्तुत करता है। कवि पूछता है, "महल पर बिखरे बालों और सजे-धजे वक्ष वाली वह स्त्री कौन है?" फिर, यह एक और दृश्य पर जाता है, पूछता है, "और नदी किनारे कोमल घास पर बैठी, विचारों में खोई वह पनिहारिन कौन है?" कवि दो भिन्न स्त्रियों को देख रहा है, एक भव्य महल में, शायद विलासिता या चिंतन में डूबी हुई, और दूसरी एक साधारण, प्राकृतिक परिवेश में, गहन विचारों में मग्न। यह विभिन्न जीवन और उनके आत्मनिरीक्षण के क्षणों का एक मार्मिक अवलोकन है, जो स्थिति या परिवेश की परवाह किए बिना, विचार और अस्तित्व के सार्वभौमिक मानवीय अनुभव को उजागर करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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