“I saw the labourers and gardeners, packed and replete,No space was found to put even a single grain.”
मैंने मजदूरों और मालियों को भरा हुआ और पूरा देखा, इतनी भीड़ थी कि एक दाना भी रखने की जगह नहीं मिली।
यह दोहा अत्यधिक भीड़ का एक जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है। यह मजदूरों और माली को इतनी घनीभूत अवस्था में दिखाता है कि एक कण रखने की भी जगह नहीं बची है। कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह जहाँ आप रेत का एक और दाना भी नहीं रख सकते! यह लोगों से भरे एक हलचल भरे दृश्य को व्यक्त करने का एक सुंदर तरीका है, जहाँ हर कोना भरा हुआ है, और बिल्कुल भी जगह नहीं बची है। यह बताता है कि कोई विशेष स्थान या स्थिति कितनी भरी हुई और व्यस्त हो सकती है।
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