“Or with your rising, when laborers arrive home,Drenched in their toil, to their dwelling-”
तुम्हारे उदय होने पर मजदूर अपने घर लौटते हैं, अपने श्रम से पूरी तरह भीगे हुए।
यह दोहा मज़दूरों के घर लौटने के थके हुए दृश्य को खूबसूरती से दर्शाता है। यह उस पल की बात करता है जब, शायद शाम ढलते ही या चाँद उगने लगता है, तो ये श्रमिक, दिन भर की मेहनत से चूर, आखिरकार अपने ठिकानों की ओर मुड़ते हैं। लथबथ घेर वाक्यांश उनकी पूर्ण थकावट को स्पष्ट रूप से चित्रित करता है, यह बताता है कि वे इतने थके हुए हैं कि मुश्किल से सीधे खड़े हो पाते हैं, उनके कदम भारी और लड़खड़ाते हुए हैं। यह कड़ी मेहनत, दैनिक संघर्ष और लंबे दिन के बाद आराम की लालसा की एक मार्मिक तस्वीर है। यह दोहा उन लोगों के अथक जीवन के लिए सहानुभूति जगाता है जो निर्माण और सृजन करते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
