લાખો ચીસ-નિઃશ્વાસભર્યા જગમાં, સિતમે સળગંત ધરા-તલમાં¬:

“In a world with millions of cries and sighs,The earth's core burns, by tyranny set ablaze.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

लाखों चीखों और आहों से भरे इस संसार में, अत्याचार के कारण धरती का तल जल रहा है।

विस्तार

यह दोहा एक ऐसे संसार का मार्मिक चित्रण करता है जो कष्टों से भरा है। यह लाखों चीखों और आहों की बात करता है, जो अनगिनत लोगों द्वारा अनुभव किए जा रहे दर्द और कठिनाइयों को उजागर करता है। 'अत्याचार से जलती हुई इस धरती पर' वाक्यांश अन्याय और दमन से झुलसते हुए संसार का स्पष्ट वर्णन करता है। यह व्यापक पीड़ा की भावना पैदा करता है, जहाँ मानवता पर थोपी गई कठोर वास्तविकताओं और क्रूरताओं के कारण हमारे पैरों तले की धरती भी जलती हुई महसूस होती है। यह दुख और अन्याय से बोझिल दुनिया पर एक गहरा विचार है, जो बहुत से लोगों द्वारा सहे गए गहरे कष्ट को स्वीकार करने का आह्वान है।

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