“Break, break the chains, let life's spirit cast off its prison; Awake, O society, to raise a cry against the foe!”
बेड़ियाँ तोड़ो, तोड़ो, ताकि जन-प्राण अपनी कैद त्याग दे। हे जनसमाज, जागो और शत्रु के विरुद्ध आवाज़ उठाओ।
यह प्रेरक दोहा हमें हर प्रकार के बंधन तोड़ने का आह्वान करता है। यह लोगों के लिए अपनी आत्मा और जीवन को प्रतिबंधित करने वाली बेड़ियों को त्यागने की एक भावुक पुकार है। कवि समाज से अपनी नींद से जागने और अन्याय तथा दमनकारियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने का आग्रह करते हैं। यह स्वतंत्रता का गान है, जो हमारी गरिमा और स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त करने के लिए सामूहिक कार्रवाई और विरोध को प्रोत्साहित करता है। अब समय है मुक्त होने और बोलने का!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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