હું સાંભળતી જાત નદી. મારી જળ-લેર્યોને છોગે

“I am a river, listening to myself.In the plumed crests of my water-waves.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

मैं स्वयं को सुनती हुई एक नदी हूँ। अपनी जल-लहरों की कलगी में।

विस्तार

यह काव्यात्मक दोहा एक नदी के गहरे आत्मनिरीक्षण को सुंदरता से दर्शाता है। कल्पना कीजिए कि नदी स्वयं ठहरकर अपनी ही आवाज सुन रही है, वह केवल बह नहीं रही, बल्कि अपने अस्तित्व को गहराई से महसूस कर रही है। पंक्ति "मेरी जल-लहरियों के छोर पर" बताती है कि वह अपने सबसे जीवंत हिस्सों को सुन रही है—जैसे उसकी हल्की तरंगें, उसकी चंचल धाराएँ, और हर लहर के साथ बहने वाली कहानियाँ। यह आत्म-जागरूकता का एक रूपक है, अपनी यात्रा, लय और जीवन के अनूठे गीत को वास्तव में समझने और सराहने का निमंत्रण। यह हमें भी अपने भीतर सुनने, अपने सार और प्रवाह को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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