“I dwell so far away!Thus spoke disease, sitting by the door, singing a morning tune.Alas!”
रोग दरवाज़े पर बैठा हुआ यह दावा करता है कि वह बहुत दूर है और सुबह का गीत गाता है, एक ऐसी स्थिति जिस पर "हाय रे" कहकर विलाप किया जाता है।
यह दोहा बीमारी का एक सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है। इसमें बीमारी को एक धोखेबाज इकाई के रूप में दर्शाया गया है। बीमारी कहती है, "मैं बहुत दूर रहता हूँ!" लेकिन तुरंत बाद, उसे आपके दरवाजे पर बैठकर खुशी-खुशी प्रभाती गाते हुए वर्णित किया गया है। यह एक शक्तिशाली विडंबना पैदा करता है। बीमारी दूर और हानिरहित होने का दिखावा करती है, लेकिन वह वास्तव में यहीं है, अपनी उपस्थिति की घोषणा एक भ्रामक प्रसन्नता के साथ कर रही है, जैसे सुबह का कोई आगंतुक। अंतिम "हाय रे" दुख या निराशा का भाव जोड़ता है, आने वाली परेशानी की अनिवार्यता को स्वीकार करते हुए। यह एक अनुस्मारक है कि कभी-कभी खतरे हमारी कल्पना से कहीं अधिक करीब होते हैं, अक्सर झूठे आश्वासनों से छिपे होते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
