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જગપ્રેમી જોયો! દાઝ દુનિયાની જાણી! આજાર માનવ-જાત આકુલ થઈ રહી, બાપુ!

A world-lover I saw! He knew not the world's deep sorrow!Ailing humanity grows restless, O Bapu!

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

मैंने एक ऐसे जग-प्रेमी को देखा जिसने दुनिया के गहरे दुःख को नहीं जाना। हे बापू, पीड़ित मानवता बेचैन हो रही है।

विस्तार

यह दोहा उन लोगों के बीच के अंतर को बताता है जो दुनिया से प्यार करने का दावा करते हैं और दुनिया की कड़वी सच्चाई से अनजान रहते हैं। इसमें एक ऐसे व्यक्ति का वर्णन है जो खुद को 'जगतप्रेमी' मानता है, लेकिन दुनिया के गहरे दर्द और पीड़ा से बेखबर है। इस बीच, मानवता को बीमार और बहुत परेशान, बेचैन और चिंता से भरा हुआ दिखाया गया है। यह एक मार्मिक विलाप है, शायद जागरूकता के लिए एक पुकार है, जो इस बात पर प्रकाश डालता है कि मानव जाति कितनी पीड़ा का अनुभव कर रही है, मानो यह कह रहा हो, 'देखो, बापू, लोग कितना पीड़ित हैं, फिर भी कुछ अनजान रहते हैं।' यह सहानुभूति और दुनिया की वास्तविक स्थिति को समझने पर जोर देता है।

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