ग़ज़ल
ज़माना देखेगा जब मिरे दिल से महशर उठेगा गुफ़्तुगू का
ज़माना देखेगा जब मिरे दिल से महशर उठेगा गुफ़्तुगू का
अल्लामा इक़बाल· Ghazal
यह ग़ज़ल इस बात का वर्णन करती है कि जब मेरे दिल से बातें (गुफ़्तुगू) का महशर होगा, तो पूरी दुनिया (ज़माना) यह देखेगी। यह एक गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक दावा है जो वक्ता की आंतरिक शक्ति और प्रभाव को दर्शाता है।
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