ज़मीर-ए-पाक ओ निगाह-ए-बुलंद ओ मस्ती-ए-शौक़
न माल-ओ-दौलत-ए-क़ारूँ न फ़िक्र-ए-अफ़लातूँ
“O pure conscience, O elevated gaze, and the intoxication of desire, Neither the wealth of the Qaroon nor the thought of worldly ambition.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
शुद्ध अंतरात्मा, ऊँची निगाह और प्रेम का मदहोश भाव, न कालू के धन का लोभ और न ही सांसारिक महत्वाकांक्षा का विचार।
विस्तार
यह शेर असल में आत्म-सम्मान और स्वतंत्रता की घोषणा है। अल्लामा इकबाल कहते हैं कि उनकी असली दौलत किसी भौतिक चीज़ या दुनियावी शोहरत में नहीं है। यह है उनके पाक ज़मीर में, उनकी ऊँची निगाह में, और उनके जुनून में। वह कहते हैं कि न वे दुनिया की दौलत चाहते हैं, और न ही उन्हें क्षणिक सुखों की चिंता है। उनकी अमीरी तो भीतर ही है।
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