वो हर्फ़-ए-राज़ कि मुझ को सिखा गया है जुनूँ
ख़ुदा मुझे नफ़स-ए-जिबरईल दे तो कहूँ
“That letter of secret mystery that has taught me passion, / If God grants me the breath of Gabriel, what shall I say?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
वो रहस्यमय अक्षर, जिसने मुझे जुनून सिखा दिया है। अगर खुदा मुझे जिब्रील की साँस दे, तो मैं क्या कहूँगा।
विस्तार
यह शेर ज्ञान और जुनून के बीच के गहरे अंतर को दिखाता है। शायर कहते हैं कि जो पागलपन (जुनून) उन्होंने महसूस किया है, वह किसी एक 'गुप्त अक्षर' से सीखा गया है। लेकिन अगर खुदा उन्हें जिब्रील की वो दिव्य साँस दे, जो इल्म की निशानी है... तो उन्हें क्या कहना होगा? यह एहसास उस चरम अवस्था का है, जहाँ जुनून से ऊपर उठकर, रूह को इल्म का अहसास होता है।
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