तुझे याद क्या नहीं है मिरे दिल का वो ज़माना वो अदब-गह-ए-मोहब्बत वो निगह का ताज़ियाना

“How could my heart not remember that time, that era, That court of love, that unforgettable glance?”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

तुझे याद क्या नहीं है मेरे दिल का वो ज़माना, वह मोहब्बत का दरबार और वह नज़रों का ताज़ियाना।

विस्तार

यह शेर सिर्फ याद करने की बात नहीं करता, यह तो एक पूरे दौर की बात है! शायर कहते हैं कि क्या तुम्हें वो वक़्त याद नहीं, जब हमारा दिल... मुहब्बत की एक ऐसी जगह थी? वो नज़रों का जो ग़म था... वो याद क्यों नहीं आता? यह एक गहरा, दिल को छू लेने वाला नज़राना है जो बीते हुए ज़माने की याद दिलाता है।

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तुझे याद क्या नहीं है मिरे दिल का वो ज़माना | Sukhan AI