हुस्न-ए-बे-परवा को अपनी बे-नक़ाबी के लिए हों अगर शहरों से बन प्यारे तो शहर अच्छे कि बन

“If the beauty of indifference, for its unveiled face, Is to be cherished by cities, then may the cities be good.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

अगर बेपरवाह की सुंदरता को उसके नंगे चेहरे के लिए शहरों द्वारा पाला जाना है, तो शहर अच्छे बनें।

विस्तार

यह शेर उस बेमिसाल आकर्षण की बात करता है, जो किसी श्रृंगार से नहीं आता, बल्कि सादगी में होता है। शायर कह रहे हैं कि अगर किसी की खूबसूरती इतनी कमाल की हो, कि बस उसे निहारने मात्र से शहर भी प्यारे लगने लगें, तो वह आकर्षण कितना गहरा है। यह सिर्फ़ खूबसूरती की तारीफ़ नहीं है, बल्कि एक ऐसी रूहानी चमक की बात है जो माहौल को भी महका दे।

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