मिरी नवा से हुए ज़िंदा आरिफ़ ओ आमी — अल्लामा इक़बाल
मिरी नवा से हुए ज़िंदा आरिफ़ ओ आमी
दिया है मैं ने उन्हें ज़ौक़-ए-आतिश आशामी
“Arif and Ami, who were brought to life by my grace, I have given them the intoxication of the flame.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मेरी नवा से हुए ज़िंदा आरिफ़ और आमी को मैंने ज़ौक़-ए-आतिश आशामी दिया है।
विस्तार
यह शेर अल्लामा इकबाल साहब की प्रेम की गहराई को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब की बस एक झलक ने ही उन्हें ज़िंदा कर दिया.... लेकिन वो यहीं नहीं रुकते! वो दावा करते हैं कि उन्होंने खुद उन्हें जुनून की वह आग दी है, जो शाम की तरह महकती है। यह इश्क़ का वो नशा है, जो जीवन को एक नया रंग दे देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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