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ख़ीरा न कर सका मुझे जल्वा-ए-दानिश-ए-फ़रंग
सुर्मा है मेरी आँख का ख़ाक-ए-मदीना-ओ-नजफ़

I could not withstand the splendor of foreign wisdom, My eyes hold the kohl of Medina and Najaf.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

वह विदेशी ज्ञान की चमक सह नहीं पाया, मेरी आँखों में मदीना और नजफ़ की पवित्र धूल का काजल है।

विस्तार

यह शेर एक गहरे आध्यात्मिक आत्मविश्वास को बयान करता है। शायर कहते हैं कि दुनियावी ज्ञान या विदेशी चमक-दमक ('Jalwa-e-Danish-e-Farang') मुझे विचलित नहीं कर पाई। क्यों? क्योंकि मेरी आँखों का काजल (सुर्मा) महज़ श्रृंगार नहीं है। यह तो मदीना और नजफ़ की पवित्र मिट्टी है! इसका मतलब है कि शायर की रूह और उसकी पहचान, किसी भी बाहरी दिखावे से कहीं ज़्यादा मज़बूत है।

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पाठ
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