मिरी मश्शातगी की क्या ज़रूरत हुस्न-ए-मअ'नी को — अल्लामा इक़बाल

मिरी मश्शातगी की क्या ज़रूरत हुस्न-ए-मअ'नी को कि फ़ितरत ख़ुद-ब-ख़ुद करती है लाले की हिना-बंदी

“What need is there of my exquisite adornments for the beauty of meaning, For nature itself performs the henna-tying of the beloved.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

मेरे मनमोहक श्रृंगार की सुंदरता के अर्थ के लिए क्या ज़रूरत है, जब प्रकृति स्वयं प्रिय के लिए मेहंदी का श्रृंगार करती है।

विस्तार

यह शेर हमें प्रकृति के सौंदर्य और सच्चे अर्थ की बात कहता है। शायर कहते हैं कि किसी भी चीज़ की ख़ूबसूरती को दिखाने के लिए हमें कोई दिखावटी प्रयास करने की ज़रूरत नहीं होती। जैसे लाले पर हिना अपने आप चढ़ जाती है, वैसे ही असली और गहरा सौंदर्य.... वह तो फ़ितरत में ही होता है। यह शेर दिखावे से ज़्यादा, सच्चाई की अहमियत बताता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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